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Wednesday, December 11, 2013

SADA SACH BOLO Hindi Kahani

सदा सच बोलो ( हिंदी कहानी )
Posted By Shri G R Daga

एक बहुत बड़ी company के CEO जल्द ही retire होने वाले थे.

वो इस company को बहुत ही मेहनत से इस मुकाम पर लाये थे. इसलिए वो चाहते थे की किसी काबिल व्यक्ति को ही अपना उत्तराधिकारी बनाए.

इसके लिए उन्होंने अपने company में कार्य करने वाले सभी होनहार युवाओं की एक मीटिंग बुलाई.

उन्होंने उस मीटिंग में सभी को एक-एक पोधे का बीज दिया.

और कहा- इस बीज को आप लोग घर ले जाकर एक गमले में रोपे, इसकी देखभाल करें, इसे पानी दे, नियमित धूप दे, और एक साल बाद जिसका भी पौधा सबसे अच्छा होगा. उसे company का भावी CEO नियुक्त किया जाएगा.

सभी कार्यकर्ता इस बात से बहुत खुश हुए, सभी को यकीन था की वो ही इस प्रतियोगिता में विजय होगे.

इन्ही में से एक काबिल नौजवान लड़की थी भावना’. उसे भी इसमें बड़ा interest आया.

जैसे ही ऑफिस से छुट्टी हुई, वो रास्ते में एक छोटा प्यारा गमला ख़रीद लायी. और घर जाते ही उस बीज को उस गमले में रोप दिया.

उसने अपने पापा को भी सारी बात बताई. और उसके पापा भी उसके साथ खुश हुए. पर उन्होंने उसे ये भी सलाह दी की वो अपने काम पर भी पूरा ध्यान दे. इस बीज के साथ साथ, अपने office के हर कार्य को संपूर्ण लगन से करे..

कुछ दिन बीत गए.. भावना रोज गमले में पानी देती, उसका पूरा ध्यान रखती. पर उसमे से कुछ भी नहीं निकलता.

1
हफ्ता गुजरा, 2 हफ़्ते गुजरे, 1 महीना हो गया.. पर वो बीज अंकुरित नहीं हुआ..

भावना बहुत उदास हुई.. पर वो अपने काम में मन लगाये हुए थी..

6
महीने बाद भावना ने अपने बचपन के दोस्त से शादी कर ली.. और अपने नए घर में अपना गमला भी लेकर आई..

समय बीतता गया.. गमले में कुछ भी नहीं उगा.. भावना को रोज गमले में पानी डालते देख, उसके पति ने भी उससे सवाल किया की आखिर ये है क्या?

तब उसने उसे सबकुछ बता दिया. उसने भावना को परेशान न होने की सलाह दी और काम करते रहने को कहा..

धीरे धीरे वो दिन भी आ गया. जब सभी को company में अपने अपने पौधे लेकर आने थे.

भावना ने अपने पति से कहा की वो इस ख़ाली गमले के साथ company नहीं जा सकती. ऐसे तो उसकी बहुत बैज्ज़ती होगी.

उसके पति ने उसे समझाया की उसे honest रहना चाहिए. और जो हुआ उसे फेस करना चाहिए.

भावना ख़ाली गमला लेकर company गयी.

उसे इस तरह देख सभी ने उसका मजाक उड़ाया. तभी meeting start हो गयी. company के CEO ने सभी के हरे भरे गमले देख फक्र से कहा, “मुझे आप सभी पर गर्व है. आपने अपने पौधों का बहुत ही अच्छा ख्याल रखा है.

पर जैसे ही भावना का गमला देखा.. उन्होंने उससे पूछा की आखिर उसका गमला ख़ाली क्यों है?

भावना ने उन्हें सबकुछ सच सच बता दिया.

CEO
ने भावना को छोड़ सभी को बैठने के लिए कहा.

और announce किया आज से आपकी नयी CEO है भावना शर्मा

सभी हैरान हो गए.

आखिर ये CEO कैसे बन सकती है? इसका तो पौधा उगा भी नहीं.सभी ने सवाल उठाये.

तब वृद्ध CEO ने कहा- दरअसल, एक साल पहले मैंने आप सभी को जो बीज दिए थे. वो उबले हुए थे. उनमे जान ही नहीं थी. उनमे से पौधा उगाया ही नहीं जा सकता था. केवल भावना ने ही सच्चाई सामने रखी. और इसीलिए यही CEO पद की असली हक़दार है.

***
निवेदन  यह पोस्ट Guest Post  के द्वारा अतिथि लेखक द्वारा प्रेषित है, अगर आपको इस पोस्ट के संबन्ध में कोई आपत्ती है तो कृप्या सूचित करे ‌‌।

Friday, November 22, 2013

पंचतंत्र की लोकप्रिय कहानी : बंदर का कलेजा

पंचतंत्र की लोकप्रिय कहानी : बंदर का कलेजा (Panchtantra Ki Kahani)

किसी नदी के किनारे एक बहुत बड़ा पेड़ था। उस पर एक बंदर रहता था। उस पेड़ पर बड़े मीठे-रसीले फल लगते थे। बंदर उन्हें भर पेट खाता और मौज उड़ाता। वह अकेला ही मजे से दिन गुजार रहा था।
एक दिन एक मगर नदी से निकलकर उस पेड़ के तले आया जिस पर बंदर रहता था। पेड़ पर से बंदर ने पूछा

‘‘तू कौन है, भाई ?’’

मगर ने ऊपर बंदर की ओर देखकर कहा, ‘‘मैं मगर हूं। बड़ी दूर से आया हूं। खाने की तलाश में यों ही घूम रहा हूं।’’

बन्दर ने कहा, ‘‘यहां पर खाने की कोई कमी नहीं है। इस पेड़ पर ढेरों फल लगते हैं। चखकर देखो। अच्छे लगे तो और दूंगा। जितने जी चाहे खाओ।’’ यह कहकर बन्दर ने कुछ फल तोड़कर मगर की ओर फेंक दिए।

मगर ने उन्हें चखकर कहा, ‘‘वाह, यह तो बड़े मजेदार फल हैं।’’

बन्दर ने और भी ढेर से फल गिरा दिए। मगर उन्हें भी चट कर गया और बोला, ‘‘कल फिर आऊंगा। फल खिलाओगे ?’’

बन्दर ने कहा, ‘‘क्यों नहीं ? तुम मेरे मेहमान हो। रोज आओ और जितने जी चाहे खाओ।’’

मगर अगले दिन आने का वादा करके चला गया।

दूसरे दिन मगर फिर आया। उसने भर पेट फल खाए और बंदर के साथ गपशप करता रहा। बंदर अकेला था। एक दोस्त पाकर बहुत खुश हुआ।

अब तो मगर रोज आने लगा। मगर और बंदर दोनों भरपेट फल खाते और बड़ी देर तक बातचीत करते रहते।

एक दिन वो यों ही अपने-अपने घरों की बातें करने लगे। बातों-बातों में बंदर ने कहा, ‘‘मगर भाई, मैं तो दुनिया में अकेला हूं और तुम्हारे जैसा मित्र पाकर अपने को भाग्यशाली समझता हूं।’’

मगर ने कहा, ‘‘मैं तो अकेला नहीं हूं , भाई। घर में मेरी पत्नी है। नदी के उस पार हमारा घर है।’’

बंदर ने कहा, ‘‘तुमने पहले क्यों नहीं बताया कि तुम्हारी पत्नी है। मैं भाभी के लिए भी फल भेजता।’’

मगर ने कहा कि वह बड़े शौक से अपनी पत्नी के लिए रसीले फल ले जाएगा। जब मगर जाने लगा तो बंदर ने उसकी पत्नी के लिए बहुत से पके हुए फल तोड़कर दे दिए।

उस दिन मगर अपनी पत्नी के लिए बंदर की यह भेंट ले गया।

मगर की पत्नी को फल बहुत पसन्द आए। उसने मगर से कहा कि वह रोज इसी तरह रसीले फल लाया करे। मगर ने कहा कि वह कोशिश करेगा।

धीरे-धीरे बंदर और मगर में गहरी दोस्ती हो गई। मगर रोज बंदर से मिलने जाता। जी भरकर फल खाता और अपनी पत्नी के लिए भी ले जाता।

मगर की पत्नी को फल खाना अच्छा लगता था।, पर अपने पति का देर से घर लौटना पसंद नहीं था। वह इसे रोकना चाहती थी। एक दिन उसने कहा, ‘‘मुझे लगता है तुम झूठ बोलते हो। भला मगर और बंदर में कहीं दोस्ती होती है ? मगर तो बंदर को मार कर खा जाते हैं।

मगर ने कहा, ‘‘मैं सच बोल रहा हूं। वह बंदर बहुत भला है। हम दोनों एक दूसरे को बहुत चाहते हैं। बेचारा रोज तुम्हारे लिए इतने सारे बढ़िया फल भेजता है। बंदर मेरा दोस्त होता तो मैं फल कहां से लाता ? मैं खुद तो पेड़ पर चढ़ नहीं चढ़ सकता।’’

मगर की पत्नी बड़ी चालाक थी। उसने मन में सोचा, ‘‘अगर वह बंदर रोज-रोज इतने मीठे फल खाता है तो उसका मांस कितना मीठा होगा। यदि वह मिल जाए तो कितना मज़ा जाए।यह सोचकर उसने मगर से कहा, ‘‘एक दिन तुम अपने दोस्त को घर ले आओ। मैं उससे मिलना चाहती हूं।’’
मगर ने कहा, ‘‘नहीं, नहीं, यह कैसे हो सकता है ? वह तो जमीन पर रहने वाला जानवर है। पानी में तो डूब जाएगा।’’

उसकी पत्नी ने कहा, ‘‘तुम उसको न्योता तो दो। बंदर चालाक होते हैं। वह यहां आने का कोई उपाय निकाल ही लेगा।’’

मगर बंदर को न्योता नहीं देना चाहता था। परन्तु उसकी पत्नी रोज उससे पूछती कि बंदर कब आएगा। मगर कोई कोई बहाना बना देता। ज्यों-ज्यों दिन गुजरते जाते बंदर के मांस के लिए मगर की पत्नी की इच्छी तीव्र होती जाती।

मगर की पत्नी ने एक तरकीब सोची।

एक दिन उसने बीमारी का बहाना किया और ऐसे आंसू बहाने लगी मानो उसे बहुत दर्द हो रहा है। मगर अपनी पत्नी की बीमारी से बहुत दुखी था। वह उसके पास बैठकर बोला, ‘‘बताओ मैं तुम्हारे लिए क्या करूं ?’’
पत्नी बोली, ‘‘मैं बहुत बीमार हूं। मैंने जब वैद्य से पूछा तो वह कहता है कि जब तक मैं बंदर का कलेजा नहीं खाऊंगी तब तक मैं ठीक नहीं हो सकूंगी।’’

बंदर का कलेजा ?’’ मगर ने आश्चर्य से पूछा।

मगर की पत्नी ने कराहते हुए कहा, ‘‘हां, बंदर का कलेजा। अगर तुम चाहते हो कि मैं बच जाऊं तो अपने मित्र 
बंदर का कलेजा लाकर मुझको खिलाओ।’’

मगर ने दुखी होकर कहा, ‘‘यह भला कैसे हो सकता है ? मेरा वही तो एक दोस्त है। उसको भला मैं कैसे मार सकता हूं ?’’

पत्नी ने कहा, ‘‘अच्छी बात है। अगर तुझको तुम्हारा दोस्त ज्यादा प्यारा है तो उसी के पास जाकर कहो। तुम तो चाहते ही हो कि मैं मर जाऊं।’’

मगर संकट में पड़ गया। उसकी समझ में नहीं आया कि कि वह क्या करे। बंदर का कलेजा लाता है तो उसका प्यारा दोस्त मारा जाता है। नहीं लाता है तो उसकी पत्नी मर जाती है। वह रोने लगा और बोला, ‘‘मेरा एक ही तो दोस्त है। उसकी जान मैं कैसे ले सकता हूं ?’’

पत्नी ने कहा, ‘‘तो क्या हुआ ? तुम मगर हो। मगर तो जीवों को मारते ही हैं।’’
मगर और जोर-जोर से रोने लगा। उसकी बुद्धि काम नहीं कर रही थी। पर इतना वह जरूर चाहता था कि वह अपनी पत्नी का जीवन जैसे भी हो बचाएगा।

यह सोचकर वह बंदर के पास गया। बंदर मगर का रास्ता देख रहा था। उसने पूछा, ‘‘क्यों दोस्त, आज इतनी देर कैसे हो गई ? सब कुशल तो है ?’’

मगर ने कहा -’’ मेरा और मेरी पत्नी का झगड़ा हो गया है। वह कहती है कि मैं तुम्हारा दोस्त नहीं हूं क्योंकि मैंने तुम्हें अपने घर नहीं बुलाया। वह तुमसे मिलना चाहती है। उसने कहा है कि मैं तुमको अपने साथ ले आऊं। अगर नहीं चलोगे तो वह मुझसे फिर झगड़ेगी।’’

बन्दर ने हंसकर कहा, ‘‘बस इतनी-सी बात थी ? मैं भी भाभी से मिलना चाहता हूं। पर मैं पानी में कैसे चलूंगा 
? मैं तो डूब जाऊंगा।’’

मगर ने कहा, ‘‘उसकी चिंता मत करो। मैं तुमको अपनी पीठ पर बिठाकर ले जाऊंगा।’’ बंदर राजी हो गया। वह पेड़ से उतरा और उछलकर मगर की पीठ पर सवार हो गया।
नदी के बीच में पहुंचकर मगर पानी में डुबकी लगाने को था कि बंदर डर गया और बोला, ‘‘क्या कर रहे हो भाई ? डुबकी लगाई तो मैं डूब जाऊंगा।’’

मगर ने कहा, ‘‘मैं तो डुबकी लगाऊंगा। मैं तुमको मारने ही तो लाया हूं।’’
यह सुनकर बंदर संकट में पड़ गया। उसने पूछा, ‘क्यों भाई, ‘‘मुझे क्यों मारना चाहते हो ? मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है ?’’

मगर ने कहा, ‘‘मेरी पत्नी बीमार है। वैद्य ने उसका एक ही इलाज बताया है। यदि उसको बंदर का कलेजा खिलाया जाए तो वह बच जाएगी। यहां और कोई बंदर नहीं है। मैं तुम्हारा ही कलेजा अपनी पत्नी को खिलाऊंगा।’’

पहले तो बंदर भौचक्का-सा रह गया। फिर उसने सोचा कि अब केवल चालाकी से ही अपनी जान बचाई जा सकती है उसने कहा, ‘‘मेरे दोस्त ! यह तुमने पहले ही क्यों नहीं बताया? मैं तो भाभी को बचाने के लिए खुशी-खुशी अपना कलेजा दे देता। लेकिन वह तो नदी किनारे पेड़ पर रखा है। मैं उसे हिफाजत के लिये वहीं रखता हूं। तुमने पहले ही बता दिया होता तो मैं उसे साथ ले आता।’’

यह बात है ?’’ मगर बोला।

‘‘हां जल्दी वापस चलो। कहीं तुम्हारी पत्नी की बीमारी बढ़ जाए।’’
मगर वापस पेड़ की ओर वापस तैरने लगा और बड़ी तेजी से वहां पहुंच गया।

किनारे पहुंचते ही बंदर छलांग मारकर पेड़ पर चढ़ गया। उसने हंसकर मगर से कहा, ‘‘जाओ मूर्खराज अपने घर लौट जाओ। अपनी दुष्ट पत्नी से कहना कि तुम दुनिया के सबसे बड़े मूर्ख हो। भला कहीं कोई अपना कलेजा निकाल कर अलग रख सकता है?’’

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