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Thursday, October 16, 2014

तनाव से निपटने के 5 सरल उपाय ( How to avoid depression )

5 Ways to Avoid Depression

विशेषज्ञों के अनुसार डॉक्टर्स के पास जाने वाले 90 प्रतिशत मरीज तनाव depression के कारण आते हैं। जब हमारे शरीर या मन को किसी चुनौती का सामना करना पड़ता है तो हमारी मेटाबॉलिज्म प्रक्रिया तेज हो जाती है, ब्लडप्रेशर ( Blood presser ) और ह्रदय की धड़कन बढ़ जाती है और शरीर में रक्तसंचार तेज होता है।
शरीर में एड्रनलीन की मात्रा बढ़ जाती है। यह स्थिति अधिक देर बनी रहे तो कई शारीरिक व मानसिक समस्या पैदा हो जाती हैं। आइए जानते हैं 5 सरल तरीके तनाव depression से पिटने के-

आहार : कुछ भोजन ऐसे हैं, जो हमारे शरीर को तनाव depression से लड़ने की शक्ति देते हैं। संतरे, दूध व सूखे मेवे में पोटेशियम की मात्रा अधिक होती है, जो हमारे दिमाग को शक्ति प्रदान करती है। आलू में विटामिन 'बी'  (Vitamin B ) समूह के विटामिन (Vitamin)  काफी मात्रा में होते हैं, जो हमें चिंता और खराब मूड का मुकाबला करने में सहायता देते हैं।  
चावल, फिश, बिन्स, और अनाज में विटामिन 'बी' ( Vitamin B ) होता है, जो दिमागी बीमारियों और डिप्रेशन depression को दूर रखने में सहायक है। हरी पत्ते वाली सब्जियां, गेहूं, सोयाबीन, मूं गफली, आम और केले में मैग्नीशियम की मात्रा अधिक होती है, जो हमारे शरीर को तनाव depression से लड़ने में सहायता देती है।

थोड़ा-थोड़ा खाएं : एक्सपर्ट्स के अनुसार तनाव की स्थिति में थोड़ा-थोड़ा करके कई बार खाना तनाव को दूर भगाने में सहायक हो सकता है। इससे उन लोगों को भी सहायता मिल सकती है, जो तनाव की स्थिति में अतिरिक्त खाने के आदी हैं। थोड़ा-थोड़ा खाने से शरीर को शक्ति मिलती रहती है।

मन में मत रखिए : आप किसी भी कारण से तनावग्रस्त (depression ) हों, अपनी समस्या अपने पार्टनर,प्रेमी, या किसी करीबी मित्र से खुलकर चर्चा करें। इस चर्चा से ही आपका आधा तनाव depression दूर हो जाता है। शेष समस्या खाने, हल्की एक्सरसाइज और खुलकर सोने से दूर की जा सकती है।

कुछ देर अपने साथ रहें : जिनके जीवन में अधिक तनाव रहता हो, उन्हें दिन में कुछ समय अकेले बिताने का प्रयास करना चाहिए। कुछ लोग अकेले सैर करना पसंद करते हैं। कुछ लोगों को अकेले पुस्तक पढ़ने से शांति मिलती है। कई बार अंधेरे कमरे ( Dark Room ) में लेटना ही मन को शांत रखने के लिए काफी होता है, किंतु बहुत ज्यादा अकेले रहना भी ठीक नहीं, विशेषतः उन लोगों के लिए जो जल्दी हताश हो जाते हैं। पर्सनल क्वॉलिटी टाइम निकालें।

मेडिटेशन : कुर्सी पर आरामदेह मुद्रा में बैठ जाइए। आंखें बंद कीजिए और अपनी मांसपेशियों को ढीला छोड़ दीजिए। धीमी गति से सांस लेते रहें। मन ही मन कोई भी एक शब्द या मंत्र बार-बार दोहराते रहें। यदि आपका मन भटक जाए तो वापस उसी शब्द या मंत्र पर आ जाएं। इसे दस से बीस मिनट तक करें।
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Sunday, December 2, 2012

कैसे पाएं कब्ज से हमेशा के लिये छुटकारा


कब् की समस्या बच्चों और बडों में आम है। शरीर में पानी की कमी, डाइट में पोषण की कमी, व्यायाम ना करना और खराब लाइफस्टाइल की वजह से हर इंसान कब् से पीडित हो चुका है। आप कब् की समस्या को ठीक कर सकते हैं यदि आप खूब पानी पिये और अपनी लाइफस्टाइल में सुधार लाएं तो। यहां पर कुछ उपाय दिये हुए हैं जिससे आप अपना पेट ठीक रख सकते हैं और कब् की समस्या से हमेशा के लिये छुटकारा पा सकते हैं।

इस प्रकार सही रखिये अपना पेट:

1. रेशेदार आहार खाएं: बींस, पत्ता गोभी, ब्रॉक्ली, टमाटर, गाजर, पत्तेदार सब्जियां, प्याज आदि खाइये। रेशायुक् आहार आराम से हजम भी जो जाता है और कब् की समस्या को भी मिटा देता है। फ्रूट्स में आपको केला, पपीता, खरबूज, नींबू, आम, सेब और मुसम्मी आदि खानी चाहिये।

2. कम मिठाई खाइये: मिठाई में चीनी की मात्रा अधिक होती है जिससे वह ठीक प्रकार से शरीर में घुलती नहीं है और हजम नहीं होती। यदि आपको कब् से छुटकारा पाना है तो आपको मिठाई का सेवन कम करना होगा।

3. खूब सारा पेय पीजिये: शरीर में तरल पदार्थ की कमी की वजह से भी कब् हो जाता है। शरीर में रेशा तभी घुलेगा जब आप पानी पियेगे। पानी पीने से शरीर की गंदगी बाहर निकलती है।

4. सुबह पीजिये गरम पानी और नींबू: कई लोग सुबह उठते ही खूब सारा पानी पीते हैं जिससे उनका पेट सही रहे, लेकिन अगर आप गरम नींबू पानी पियेंगे तो आपका पाचन सही रहेगा और कब् की शिकायत नहीं होगी।

5. वसायुक् आहार ना खाएं: क्या आपको पिज्जा, बर्गर, फ्रेंच फ्राइज या फिर रोल् बहुत पसंद हैं? तो फिर यह फैटी फूड आपका पेट कभी भी सही नहीं रख सकते। इनमें बिल्कुल भी फाइबर नहीं होता इसलिये अच्छा होगा कि आप साबुत अनाज खाएं जो जल्दी हजम हो जाता है।


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Tuesday, November 13, 2012

लंबे समय तक कम्प्यूटर पर बैठने वालों के लिए कुछ खास टिप्स


दिनभर कम्प्यूटर पर कार्य करने वाले अधिकांश लोगों में एक समय बाद चिड़चिड़ापन जाता है और वे मानसिक तनाव भी झेलते हैं। जिससे उनका पारिवारिक जीवन और कार्यक्षमता भी प्रभावित होती है। समय रहते इस तनाव को दूर करने का उपाय कर लिया जाए तो आप भी हमेशा खुश और स्वस्थ रह सकते हैं। आपकी आंखों की रोशनी हमेशा चमकती रहेगी और चश्मों आदि से निजात मिलेगी।

Sunday, October 21, 2012

क्या होता है मेडिटेशन, कैसे सुबह के 20 मिनट में दिनभर बने रहें तरोताजा



पं. विजयशंकर मेहता

देखने की गुणवत्ता और होशपूर्वक सजगता से देखने की गुणवत्ता का नाम है ध्यान। हमें एक बात ध्यान रखना है कि ध्यान का अर्थ है होश। जो कुछ भी हम होश पूर्वक करते हैं वह ध्यान है। ध्यान का अर्थ है अकेले होने का आनंद। होशपूवर्ण काम मतलब खाते समय बस खाओ, इसमें तल्लीन रहो, चलते समय बस चलो इसमें तल्लीन रहो। उसी क्षण में बने रहना चाहिए। उस क्षण के आगे होना चाहिए। यहां वहां उछलें, क्यों मन या तो हमेशा आगे चलता है या पीछे घिसटता है। वर्तमान क्षण में टिके रहो, यह ध्यान है।

    ध्यान की कुछ प्रमुख अवस्थाएं हैं विधियां है, जो हमें उचित लगे उसे हमें स्वीकार करना है। एक स्वर्णिम प्रकाश हमारे भीतर और बाहर है, ध्यान इसी से शुरू करते हैं। इसे दिन में कम से कम दो बार करें, सबसे अच्छा समय है सुबह का। ठीक, हमारे बिस्तर से उठने से पहले, जिस क्षण हमें लगे कि हम जाग गए हैं, इसे कम से कम 20 मिनट के लिए किया जाए। सुबह सबसे पहले यही काम करें, बिस्तर से मत उठे, वहीं उसी समय, तत्क्षण इस विधि को करें क्योंकि जब हम नींद से जाग रहे होते हैं तब बहुत नाजुक और संवेदनशील होते हैं, जब हम नींद से बाहर रहे होते हैं तब हम बहुत ताजे होते हैं। और इस विधि का प्रभाव बहुत गहरा होता जाएगा।
   
 जिस समय हम नींद से बाहर रहे होते हैं उस समय हम सदा की अपेक्षा हम बुद्धि में कम होते हैं। तो कुछ अंतराल है जिनके माध्यम से ध्यान की यह विधि हमारे अन्तरतम सत्व में प्रवेश कर जाएगी। और सुबह-सुबह जब हम जाग रहे होते हैं, पूरी पृथ्वी जाग रही होती है, उस समय पूरे विश्व में जाग रही ऊर्जा, एक विशाल लहर होती है, उस लहर का उपयोग करने वाले अवसर को चूकें।
     
सभी प्राचीन धर्म सुबह-सुबह प्रार्थना किया करते थे। जब सूर्य उगता है क्योंकि सूर्य का उगना अस्तित्व में व्याप्त सभी ऊर्जाओं का उदित होना है। इस क्षण में हम उदित होती ऊर्जा की लहर पर सवार हो सकते हैं। यह सरल होगा। शाम तक यह कठिन हो जाएगा, ऊर्जाएं वापस बैठने लगेगी, तब हम धारा के विरूद्ध लडेंगे। सुबह के समय इस धारा के साथ होंगे।
     
तो इस शुरू करने का सबसे अगछा समय सुबह-सुबह का है। ठीक उस समय जब हम आधे सौए और आधे जागे हुए होते हैं। यह प्रक्रिया बड़ी सरल है। इसके लिए किसी मुद्रा, आसन, स्नान आदि की जरूरत नहीं है।
    
 हम अपने बिस्तर पर पीठ के  बल लेटे रहें। अपनी आंखों को बंद रखें, जब हम श्वास को भीतर लें तो कल्पना करें कि एक विशाल प्रकाश हमारे सर से होकर गुजर कर हमारे शरीर में प्रवेश कर रहा है। जैसे हमारे सिर के निकट ही कोई सूर्य उग आया हो। स्वर्णिम प्रकाश हमारे सिर मे ऊंडल रहा है, और गहरे से गहरा जाता जा रहा है। हमारे पंजों से बाहर निकल रहा है। जब हम श्वास भीतर लें तो इस कल्पना के साथ लें। और जब श्वास छोडे तो एक कल्पना करें, अंधकार पंजों से प्रवेश कर रहा है। एक विशाल अंधेरी नदी हमारे पंजों में प्रवेश कर रही है। ऊपर बढ़ रही है और हमारे सिर से बाहर निकल रही है। श्वास धीमी ओर गहरी रखें ताकि हम कल्पना कर सकें।
     
बहुत धीरे-धीरे बढ़े। बिल्कुल धीरे-धीरे, बहुत धीरे-धीरे, यह करें। सोकर उठने के बाद हमारी श्वास धीमी और गहरी हो सकती हैं। क्योंकि शरीर विश्रांत और शिथिल है।
   
 एक बार और दोहरा लें, श्वास लेते हुए स्वर्णिम प्रकश को अपने भीतर आने दें क्योंकि वहीं पर स्वर्णपुष्प प्रतीक्षा कर रहा है, वह स्वर्णिम प्रकाश सहायक होगा, वह पूरे शरीर को स्वच्छ कर देगा। और से सृजनात्मकता से पूरी तरह भर देगा। यह पुरुष ऊर्जा है। और जब हम श्वास छोडे तो अंधकार को जितने अंधेरे की हम कल्पना कर सकते हैं, जैसे कोई अंधेरी रात के समान, अपने पंजों से इस अंधेरे को ऊपर उठने दें, यह स्त्रैण ऊर्जा है। यह हमें शांत करेगी। हमें ग्राह्यï बनाएगी, हमें मौन करेगी। हमें विश्राम देगी, उसे अपने अपने सिर से बाहर निकल जाने दें।
   
 देखिए, अंधकार बाहर निकल रहा है, तब फिर से श्वास लें और स्वर्णिम प्रकाश भीतर प्रवेश कर जाता है। इसे सुबह-सुबह के लिए 20 मिनट के लिए करें और दूसरा सबसे अच्छा समय है रात में, जब हम नींद में लौट रहे हों। बिस्तर पर लेट जाएं, कुछ मिनट आराम करें। और जब हमें लगे कि अब हम सोने और जागने के बीच डोल रहे हैं तो ठीक उस समय, उस मध्य में प्रक्रिया से फिर से शुरू करे दें और 20 मिनट तक जारी रखें। यदि हम इसे करते-करते सो जाएं तो सबसे अच्छा है। क्योंकि इसका प्रभाव अचेतन में बना रहेगा और वह कार्य करता चला जाएगा। महिने, दो महिने, तीन महिने की अवधि के बाद हम आश्चर्यचकित होंगे। जो ऊर्जा सतत मूलाधार पर, निम्नतम काम केंद्र पर इकट्ठी हो रही थी, अब वहां इकट्ठी नहीं हो रही है। वह ऊपर जा रही है।

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