Sunday, March 8, 2026

जय -जय गिरिवर राज किशोरी

 

जय -जय गिरिवर राज किशोरी ।

जय महेश मुख चन्द चकोरी।।

जय गजबदन षडाननमाता ।

जगत जननी दामिनी दुति गाता।।

नहिं तव आदि मध्य अवसाना ।

अमित प्रभाउ बेदु नहिं जाना ।।

भव भव विभव पराभव कारिनि।

विश्व बिमोहनि स्वबस बिहारिनि।।

दोहा-

पति देवता सुतीय महुँ    मातु प्रथम  तव रेख।

महिमा अमित न सकहिं कहि   सहस्  सारदा सेष।।

सेवत तोहि सुलभ फल चारी।

बरदायनी पुरारी पिआरी।।

देबि पूजि पद कमल तुम्हारे ।

सुर नर मुनि सब होहिं सुखारे।।

मोर मनोरथु जानहु नीकें।

बसहु सदा उर पुर सबहीं के ।।

कीन्हेऊँ प्रगट न कारन तेहीं।

अस कहि चरन गहे बैदेही ।।

बिनय प्रेम बस भई भवानी ।

खसी माल मूरति मुसकानी ।।

सादर सियँ प्रसादु सिर धरेऊ।

बोली गौरि हरषु हियँ भरेऊ ।।

सुनु सिय सत्य असीस हमारी ।

पूजिहिं मनकामना तुम्हारी ।।

नारद बचन सदा सुचि साचा ।

सो बरू मिलिहि जाहिं मनु राचा ।।

मनु जाहिं  राचेउ मिलिहि सो बरू सहज सुंदर साँवरो ।
करुना निधान सुजान सीलु सनेह जानत रावरो ।।

एहि भाँति गौरि असीस सुनि सिय सहित हियँ हरषीं अली ।

तुलसी भवानिहि पूजि पुनि  पुनि मुदित मन मंदिर चली ।।

जानि गौरि अनुकूल सिय हिय हरषु न जाय कहि ।
 
मंजुल मंगल मूल बाम अंग फरकन लगे ।।

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